जयपुर दिव्यराष्ट्र/: भारत बढ़ते हुए श्वसन स्वास्थ्य बोझ का सामना कर रहा है, जहां क्रॉनिक रेस्पिरेटरी डिजीज (सीआरडीज) गैर-संचारी रोगों (एनसीडीज) में प्रमुख स्थान रखती हैं। सीआरडी के कारण वैश्विक स्तर पर होने वाली कुल मौतों और विकलांगता-समायोजित जीवन वर्षों (डीएएलवाईज) में भारत का योगदान 30% से अधिक है, इसके बावजूद कम निदान एक गंभीर चुनौती बना हुआ है, जिसमें अस्थमा और सीओपीडी के अधिकांश मामले पहचान से बाहर रह जाते हैं। इसी दिशा में सिप्ला का ब्रीदफ्री लंग वेलनेस सेंटर अहम भूमिका निभा रहा है। हाल ही में दिल्ली और मुंबई में शुरू किए गए ये सेंटर 60 से अधिक उन्नत श्वसन नैदानिक परीक्षण उपलब्ध कराते हैं, जिनमें ऑसिलोमेट्री भी शामिल है—यह एक ध्वनि तरंग-आधारित फेफड़ों की कार्यप्रणाली जांच है, जो छोटे बच्चों जैसे रोगियों के लिए भी उपयुक्त है।
डॉ. विकास पिलानिया, पल्मोनोलॉजिस्ट, जयपुर ने कहा, “यह तथ्य है कि सांस की बीमारियां लोगों की ज़िंदगी और हेल्थकेयर सिस्टम, दोनों पर बहुत ज़्यादा भार बनी हुई हैं। ऐसे में व्यापक समाधानों की तुरंत ज़रूरत है जो बीमारी का जल्दी पता लगाने, डायग्नोसिस और इलाज को प्राथमिकता दें। ब्रीदफ्री लंग वेलनेस सेंटर जैसे वन-स्टॉप सेंटर, फेफड़ों के स्वास्थ्य से जुड़ी पूरी डायग्नोस्टिक्स और केयर सर्विस को मरीज़ों के करीब लाकर इस कमी को पूरा करने में मदद करते हैं ।
डॉ. राहुल अहलूवालिया, कंसल्टेंट पल्मोनोलॉजिस्ट, जयपुर ने कहा , “अस्थमा और सीओपीडी जैसी बीमारियों पर अक्सर सालों तक ध्यान नहीं जाता, क्योंकि इसके बारे में कम जानकारी, गलतफ़हमी और सही टेस्टिंग तक पहुंच कम होती है। इसके अलावा, ट्रेंड लोगों और स्पाइरोमेट्री जैसे भरोसेमंद टूल्स की कमी से समय पर डायग्नोसिस और भी मुश्किल हो जाता है। ब्रीदफ्री लंग वेलनेस सेंटर जैसी सुविधाएं सही दिशा में एक कदम हैं।”
सेंटर मरीजों को पल्मोनरी न्यूट्रिशन, रिहैबिलिटेशन और स्मोकिंग छोड़ने की काउंसलिंग में भी मदद करता है, और उनकी रिकवरी जर्नी के हर चरण में उनकी सहायता करता है।