दिव्यराष्ट्र, जयपुर: भारत की उपभोग-आधारित आर्थिक वृद्धि अब एक नए और निर्णायक चरण में प्रवेश कर रही है, जो अब केवल बड़े मेट्रो शहरों तक सीमित नहीं है। टियर-2 और टियर-3 शहर, उभरते शहरी क्षेत्र और छोटे कस्बे अब मांग, उद्यमिता और दीर्घकालिक आर्थिक गति को आगे बढ़ा रहे हैं। इसी बदलाव को दर्शाते हुए, शुरुआती चरण के कंज़्यूमर ब्रांड्स में निवेश करने वाली वेंचर कैपिटल फर्म रुकम कैपिटल ने अपनी नई रिसर्च रिपोर्ट “बियॉन्ड मेट्रोस: द रियल स्टोरी ऑफ़ भारत नेक्स्ट 500 मिलियन” जारी की है।
रिपोर्ट के लॉन्च पर टिप्पणी करते हुए अर्चना जहागीरदार, फाउंडर और मैनेजिंग पार्टनर, रुकम कैपिटल ने कहा, “लंबे समय तक भारत को मेट्रो शहरों के नजरिए से देखा गया, जिससे उपभोक्ताओं की सही समझ नहीं बन पाई। इस अध्ययन में हमें एक आत्मविश्वासी और सोच-समझकर निर्णय लेने वाला उपभोक्ता दिखा, जो गहराई से रिसर्च करता है, समुदाय की राय पर भरोसा करता है और दिखावे से ज्यादा निरंतरता को महत्व देता है। भारत में ब्रांड्स के लिए असली अवसर भरोसा जल्दी बनाने, वास्तविक जरूरतों के अनुसार प्रोडक्ट डिज़ाइन करने और स्थानीय संदर्भ से जुड़े रहने में है।”
यह रिपोर्ट ऐसे समय में सामने आई है जब भारत की आर्थिक गतिविधियों का केंद्र स्पष्ट रूप से मेट्रो शहरों से आगे बढ़ रहा है। देश की लगभग 65% आबादी अब टियर-2, टियर-3 और ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है। जीएसटी के जरिए औपचारिकरण, कीमतों में सुधार से बढ़ती वहनीयता और 3G/4G नेटवर्क से लेकर यूपीआई जैसे डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के तेज विस्तार ने भारत को उपभोग वृद्धि का अगला बड़ा इंजन बना दिया है।
यह उपभोक्ता रिपोर्ट मेट्रो-केंद्रित धारणाओं से हटकर यह दिखाती है कि भारत में उपभोग का व्यवहार अलग सोच और तर्क पर आधारित है | जहां संदर्भ, समुदाय का प्रभाव, मूल्य को लेकर अनुशासन और डिजिटल-फर्स्ट आदतें अहम भूमिका निभाती हैं। रिपोर्ट बताती है कि आज का भारत उपभोक्ता न तो जल्दबाज़ी में खरीदारी करता है और न ही केवल विज्ञापनों से प्रभावित होता है, बल्कि वह जानकारी-आधारित, रिसर्च-ड्रिवन और भरोसे पर आधारित फैसले लेता है।