ब्यावर, कंचन केसरी/ महान व्यक्ति वही है जो अपने सहयोगियों, मित्रों के साधारण सहयोग के लिए भी प्रोत्साहित करे। श्रीकृष्ण ने मित्रता को समझकर सुदामा और मनसुखा जैसे बाल मित्रों का मान बढ़ाया। यह विचार राष्ट्र संत गोविंद गिरी महाराज ने ब्यावर में श्री सीमेंट उद्योग द्वारा आयोजित श्री कृष्ण नीति दर्शन में गुरुवार को प्रवचन के दौरान व्यक्त किए। उन्होंने कहा बड़ों को प्रणाम करने से व्यक्ति का अहंकार तो समाप्त होता ही है साथ ही बड़ों का स्नेह और आशीर्वाद भी प्राप्त होता है। उनका कहना है परिवारिक जीवन बहस और कानून से नहीं जीया जाता पारिवारिक जीवन तो केवल स्नेह से ही जीता जा सकता है। परिवार को एक सूत्र में बांधे रखने के लिए स्नेह का भंडार जरूरी है। जो व्यक्ति पहले अपने परिवार से प्रेम करेगा तभी वह व्यक्ति राष्ट्र और समाज से भी प्रेम कर पाएगा।
अब लोगों ने परिवार को एक औपचारिकता मान लिया यह उचित नहीं है। गोविन्द गिरी महाराज ने कहा नीति शास्त्र का सिद्धांत है कि जीवन में हर अच्छाई में मित्रो, परिवार की भागीदारी होनी चाहिए। उन्होंने संयुक्त परिवार प्रणाली की अच्छाई बताते हुए कहा परिवार में झुकना कोई कमजोरी नहीं बल्कि अच्छाई है। श्री कृष्ण का संदेश है कि पहले अपनो की जरूरत पूरी करो इसके बाद स्वयं की। गोविंद गिरी महाराज का कहना है की कभी कभी अपनों से सहयोग लेना भी आनंद का कारण बनता है। गोविंद गिरी महाराज ने कहा श्री कृष्ण ने सात वर्ष की उम्र में ही गिर्राज पर्वत धारण कर इंद्र का अभिमान दूर किया।
उन्होंने पर्यावरण की रक्षा का संदेश देते हुए कहा श्री कृष्ण ने पर्यावरण, गो सेवा ओर वेद पाठी ब्राह्मणों की रक्षा का संदेश दिया है। श्री कृष्ण ने गीता उपदेश के द्वारा अपने विचार प्रकट किया है मानना और नहीं मानना का दबाव नहीं दिया उनका कहना है जबरदस्ती किसी के विचार और भाव नहीं बदले जा सकते। भगवान श्री कृष्ण को वैचारिक क्रांति का पथ प्रदर्शक माना गया है।