-सुशासन दिवस के रूप में मनाया जाता है वाजपेयी का जन्मदिन
वाजपेयी की जयंती पर विशेष

चंदेल)
जयुपर। यह वाकया उस समय का है, जब भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी पहली बार लोकसभा पहुंचे थे। उनके भाषणों को सुनकर देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने कहा था कि ‘एक दिन वे उनकी कुर्सी पर आसीन होंगे।” उनकी यह भविष्यवाणी सच साबित हुई। नेहरू और वाजपेयी दोनों ही अपनी-अपनी पार्टियों के शीर्ष नेता रहे हैं, जो देश के प्रधानमंत्री बने। भारत रत्न वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर, 1924 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में हुआ , उनके पिता एक स्कूल शिक्षक थे। राजनीति में आने से पहले अटल बिहारी वाजपेयी पत्रकार और संघ कार्यकर्ता थे। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय के साथ मिलकर ‘राष्ट्रधर्म’, ‘पांचजन्य”, ‘वीर अर्जुन” और ‘स्वदेश” जैसे समाचार पत्रों के लिए उल्लेखनीय काम किया था। भाजपा की नरेंद्र मोदी सरकार ने 2014 में घोषणा की थी कि वाजपेयी के जन्मदिन को ‘सुशासन दिवस” के रूप में मनाया जाएगा। तब से वाजपेयी के जन्मदिन को सुशासन दिवस के रूप में मनाया जाता रहा है। अटल बिहारी वाजपेयी तीन बार भारत के प्रधानमंत्री बने। पहली बार 1996 में (13 दिन के लिए), दूसरी बार 1998 से 1999 तक (13 महीने के लिए) और तीसरी बार 1999 से 2004 तक पूरा कार्यकाल किया। उनका बहुआयामी व्यक्तित्व था, वे राजनेता, कवि, पत्रकार और एक प्रखर वक्ता थे। उनके भाषण और विचार सुनने के लिए प्रथम प्रधानमंत्री नेहरू संसद में मौजूद रहते थे। वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक (पूर्णकालिक कार्यकर्ता) बनने के चार साल बाद, 1951 में भारतीय जनसंघ (भाजपा का पूर्ववर्ती संगठन) से जुड़ गए। वे बीजेएस के संस्थापक अध्यक्ष श्यामा प्रसाद मुखर्जी के राजनीतिक सचिव भी रहे। वाजपेयी भाजपा के संस्थापकों में से एक रहे हैं। वे 10 बार लोकसभा और दो बार राज्यसभा सदस्य भी रहे। उन्होंने देश के विकास की आधारशिला रखी, जिनमें परमाणु परीक्षण, मजबूत विदेश नीति, दिल्ली मेट्रो परियोजना को मंजूरी , स्वर्णिम चतुर्भुज सड़क परियोजना, संचार क्रांति (दूरसंचार नीति), सर्व शिक्षा अभियान, लाहौर बस सेवा और प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना का प्रारंभ किया। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना गांवों के विकास में महत्वपूर्ण परिवर्तन ला रही है। जिन्होंने भारत को एक मजबूत राष्ट्र बनाने और बुनियादी ढांचे व कनेक्टिविटी में सुधार लाने में अहम भूमिका निभाई। दिल्ली मेट्रो आज दिल्ली की महत्वपूर्ण पहचान बन कर दिल्ली की धड़कन साबित हो रही है। वर्ष 1998 में पोखरण-परमाणु परीक्षण कराकर भारत को परमाणु शक्ति संपन्न देश के रूप में स्थापित किया, भले ही अंतर्राष्ट्रीय दबाव का डटकर सामना किया, लेकिन किसी भी देश के दबाव में नहीं आए। दूरसंचार क्षेत्र में सुधार किए और 1999 की दूरसंचार नीति लाकर मोबाइल क्रांति की नींव रखी, साथ ही चंद्रयान-1 की घोषणा की। सर्व शिक्षा अभियान की शुरुआत की, जिससे शिक्षा सभी तक पहुंच पाएं। उन्होंने भारत-पाकिस्तान शांति वार्ता का प्रयास किया, जिसके लिए उन्हें पद्मविभूषण और भारत रत्न जैसे सम्मान प्रदान किए गए। वे पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री थे, जिन्होंने अपना
पांच साल का कार्यकाल पूरा किया। बहरहाल, हम यह कह सकते हैं कि वाजपेयी राजनीति के अजातशत्रु और भीष्म पितामह थे । जीवनभर उनके प्रशंसक भाजपा के साथ विपक्षी दलों के नेता भी रहे। उनका आदर सभी दलों के नेता करते थे।